जेन ज़ी (Generation Z) कौन?
वही, जो रील को रियल दुनिया समझती है या वो जो अटेंशन पाने के लिए यह भूल जाती है कि कुछ बातें प्राइवेट होती है उसे शेयर नहीं किया जाता स्पेशली सार्वजनिक प्लेट फॉर्म पर....मुझे शिकायत इस जेनरेशन से है ही नहीं ये वो जेनरेशन है जिनके पैरेंट्स जेनरेशन एक्स (Generation X) वाले हैं...आपके घर आपके आसपास ये लोग हैं और हो सकता है कि आप लोग खुद ही हो...तो आखिर प्रॉब्लम का मुद्दा क्या है?
साहेब सीधी बात पर आते है....ये वो जेनरेशन (Generation X) है, जो टीवी देख कर बड़ी हुई है जैसे अल्फ़ा जेनरेशन मोबाइल देख कर...ye शक्तिमान की पीढ़ी नहीं है ये टाट पर बैठ कर रामायण या महाभारत या फिर यूँ कहें कि चंद्रकांता वाली पीढ़ी है...जबकि इनके दौर के अच्छे प्रोग्राम को देखने वाली पीढ़ी इनके बाद आई(zenY)....
तो फ़िर आखिर प्रॉब्लम कहां?
साहेब रुकिए, Generation X वाली पीढ़ी ने वक्त को दो हिस्से में बांट दिया पहली, ह्यूमर और दूसरी दब्बूपन....और टीवी को हक़ीकत मान कर अपने बच्चों को तैयार kiye- जिसमें; शोषण,अभिव्यक्ति की आज़ादी, संविधान के पाठ,ईश्वर के होने या न होने के तार्किक सिद्धांत जबरदस्त तरीके से गढ़ने-बनाने वाले लोग....जिनका मुद्दा सदैव एक झंडा पकड़ने का और सवाल न पूछने का, तो ऐसे में उनके बच्चे zen G ....जो अब सवाल पूछते है उन्हें नहीं पता सही या गलत क्या है बस सवाल...यदि उनके अनुरूप, तो आप सही यदि नहीं तो आप गलत....क्योंकि पैरेंट्स ने इनको सिखाया नहीं क्योंकि इस पीढ़ी को वक्त नहीं मिला कारण शादी 21 22 के age में और 42 45 तक की age बेडरूम में तो जो पीछे छूटा वो जेन जी था..... देखभाल दादी दादा द्वारा यानी Baby Boomers पीढ़ी जो आस्था तो ईश्वर पर रखती थी लेकिन समझा नहीं पाई ईश्वर कौन, जिसने पहाड़ा पढ़ना सिखाया लेकिन सही प्रयोग नहीं ,A for Apple स्कूलों में सिख रहे थे लेकिन पिता की वक्त नहीं नौकरी और बेडरुम से बच्चा बना zen G.... जो सड़कों पर आपको दिख जाएगा थोड़ा देर इस पीढ़ी से मोबाइल ले कर देखिए आपको समझ आ जायेगा ज्ञान और सहनशीलता कितना ...इन्हें क्या चाहिए?
ये खुद नहीं जानते,
इन्हें अपनी बात जस्टिफाई करने जरूरी आता है जो इनका टैलेंट है इसलिए इनको ठीक इनके ऊपर वाली पीढ़ी समझ में नही आती....,क्योंकि वह तर्क पर बात करती है, यदि राम तीर छोड़ रहे है तो सख्या बढ़ कैसे रही है वह तर्क से सिद्ध करना चाहती है(टीवी पर भी) वह उसे सही नहीं मानती, जब कंपाला प्रिंटर से बाहर आता है तो यह शक्तिमान पर हंसता है उसे स्वीकार नहीं करता यह पीढ़ी जासूस विजय की तरह बीमार तो लग सकता है लेकिन तार्किक है....भूत है तो ठंडा पानी पी कर ब्रेन रीसैट करता है, नींद नहीं आती तो सोने के लिए गिनती गिनता है(दिमाग को बोर करे) या फिर ईश्वर है तो उसे प्रूव नहीं तर्क से समझता है ....मोबाइल से ज्यादा किताब ढूंढता है....मोबाइल नहीं चल जाएगा लेकिन किताब की भूमिका अहम है.....
फिर zen जी पर आते है,
यह सामाज अभी मोबाइल और स्वयं में अटका हुआ है त्रिशंकु जैसा इसे केवल अटेंशन और पैसा(स्वर्ग) चाहिए...इसे नहीं पता यह जिस मार्ग का चुनाव कर रही है इसे उस मार्ग पर 4 से 5 सालों बाद alpha पीढ़ी मिलने वाली है जो जॉम्बी की तरह इन्हें काट खायेगी और अपने जैसा बना डालेगी....यानी इनका अस्तित्व केवल 5 से 8 सालों की है.....बस और इससे ज्यादा नहीं....
इसे ऐसे समझ सकते हो, 98 99 में बैंक में आपका काम नहीं हुआ तो आप वेट करते थे 12 13 के बाद आप बैंक कर्मचारी से लड़ते दिखे....तो अब 96 के बाद वाले लोग(Zen G) फ्रंट टेबल पर होंगे और बाहर अल्फा ....नाम से डर लगता है इनका क्या होग ?
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